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गेहूँ के ज्वारे का रस | Wheatgrass Juice in Hindi

गेहूँ के ज्वारे का रस बनाने की विधि और रस पिने के फायदे

गेहूँ ज्वारे का रस भी हल्का क्षारीय है और उसका pH भी 7.4 है। इसलिए ज्वारे का रस शीघ्रता से रक्त में अवशोषित हो जाता है और शरीर के उपयोग में आने लगता है। गेहूँ के ज्वारे से मानव को संपूर्ण पोषण मिल जाता है। सावधानी पूर्वक चुनी हुई 23 किलो तरकारियों जितना पोषण 1 किलो गेहूँ के ज्वारे के रस से प्राप्त हो जाता है।[Source]

ऐसी बहुत सारी बीमारियां सिर्फ गेहूँ के ज्वारे का रस के नियमित सेवन से ठीक होती है और हुई भी है। हर डॉक्टर इसके बारे में जानकारी नहीं देता और ना बताते है।

यूट्यूब के एक वीडियो के मुताबिक लगभग ३५० रोगों में काम आता है ये गेहूँ के ज्वारे का रस

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गेहूँ के ज्वारे का पौधा लगाने की विधि:

आप 15 छोटे छोटे गमले लेकर प्रतिदिन एक-एक गमलो में भरी गयी मिटटी में 50 ग्राम गेहू क्रमशः गेहू चिटक दे, जिस दिन आप 15 गमले में गेहू डालें उस दिन पहले दिन वाला गेहू का ज्वारा रस निकलने लायक हो जायेगा।

यह ध्यान रहे की जवारे की जड़ वाला हिस्सा काटकर फेक देंगे पहले दिन वाले गमले से जो गेहू उखाड़ा उसी दिन उसमे दूसरा पुनः गेहू बो देंगे.यह क्रिया हर गमले के साथ होगी ताकि आपको नियमित ज्वारा मिलता रहे।

आपको गेहूँ का बीज लगाना हैं। तो बीज ले लीजिए 100 ग्राम। 100 ग्राम बीज के अनुसार में ये सूत्र बता रहा हूँ।

  1. एक 100 ग्राम किसी भी देसी गौमाता या देसी बैल का गोबर ले लीजिए और उसी देसी गौमाता या देसी बैल का 100 ml मूत्र ले लीजिए।
  2. गोबर और मूत्र को आपस में मिला दीजिए। फिर इसमें 10 ग्राम कलर्इ चूना मिलाना है, कलर्इ चूना। चूने का पत्थर बाजार में मिल जाता है आसानी से।
  3. उस चूने के पत्थर को एक दिन पहले पानी में डाल दीजिए 30से 50 मिलीलीटर पानी में। रातभर में को पानी गरम हो जाएगा, फिर वो चूना शांत हो के नीचे बैठ जाएगा। फिर इसको घोल लीजिए।
  4. फिर इस 30 50 मिलीलीटर चूने वाले पानी को गोबर और गोमूत्र वाले पात्र या बर्तन में डाल दीजिए। तो गोबर-गोमूत्र और 10 ग्राम चूने में जितना घोल तैयार होगा, उसमें अच्छे से बीज को डाल दीजिए।
  5. कोई भी बीज 10 ग्राम इसमें आराम से भींग जाता है। बीज को इसमें 2-3 घंटे डालकर रखिए। रात में डाल दीजिए, सुबह इसे निकाल लीजिए।
  6. निकालकर इस बीज को छाँव में सूखा दीजिए और छाँव में सूखाने के बाद आप इसको गमले की मिट्टी में लगा दीजिए।
  7. तो जो ये बीज लगेगा मिट्टी में, ये संस्कारित हो जाएगा इस प्रकार संस्कारित बीज से प्राप्त रस सर्वोत्तम औषधीय होगा।
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गेहूँ के ज्वारे का रस बनाने की विधि:

गेहूँ के ज्वारे का रस ( गेहूं के दानों को 7 से 10 मिट्टी के बर्तन में उपजाए कुछ दिनों बाद जब पौधे उग जाए तो इसका रस 200 ml तक निम तुलसी गिलोय अदरक युक्त बनाकर सुबह खाली पेट सेवन करे 7 से 10 दिन उसके बाद जांच कराए cretinine लेवल में सुधार आ जायेगा परहेज के साथ

मिट्टी के बर्तन

पृथ्वी की संजीवनी, गेहूँ के ज्वारे का रस। Wheat Grass Juice गेहूँ का ज्वारा अर्थात गेहूँ के छोटे-छोटे पौधों की हरी-हरी पत्ती, जिसमे है शुद्ध रक्त बनाने की अद्भुत शक्ति. तभी तो इन ज्वारो के रस को “ग्रीन ब्लड” कहा गया है.

गेहूँ के ज्वारे का रस को ग्रीन ब्लड कहने का एक कारण यह भी है कि रासायनिक संरचना पर ध्यानाकर्षण किया जाए तो गेहूँ के ज्वारे का रस और मानव मानव रुधिर दोनों का ही पी.एच. फैक्टर 7.4 ही है, जिसके कारण इसके रस का सेवन करने से इसका रक्त में अभिशोषण शीघ्र हो जाता है, जिस से रक्ताल्पता(एनीमिया) और पीलिया(जांडिस) रोगी के लिए यह ईश्वर प्रदत्त अमृत हो जाता है।

गेहूँ के ज्वारे से रस निकालते समय यह ध्यान रहे कि पत्तियों में से जड़ वाला सफेद हिस्सा काट कर फेंक दे। केवल हरे हिस्से का ही रस सेवन कर लेना ही विशेष लाभकारी होता है। रस निकालने के पहले ज्वारे को धो भी लेना चाहिए. यह ध्यान रहे कि जिस ज्वारे से रस निकाला जाय उसकी ऊंचाई अधिकतम पांच से छः इंच ही हो।

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गेहूँ के ज्वारे का प्रयोग:

गेहूँ के ज्वारे का रस नियमित सेवन और नाड़ी शोधन प्रणायाम से मानव शारीर के समस्त नाड़ियों का शोधन होकर मनुष्य समस्त प्रकार के रक्तविकारों से मुक्त हो जाता है। गेहूँ के ज्वारे में पर्याप्त मात्रा में क्लोरोफिल पाया जाता है जो तेजी से रक्त बनता है इसीलिए तो इसे प्राकृतिक परमाणु की संज्ञा भी दी गयी है। गेहूँ के पत्तियों के रस में विटामिन बी.सी. और ई प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

अगर आप भयंकर से भयंकर बीमारी से ग्रस्त हैं, और आपको लगता हैं के ये बीमारिया आपकी जान ले कर ही छोड़ेंगी, और आप दवा ले ले कर थक चुके हो। तो एक बार गेंहू के जवारों को ज़रूर आज़माये।

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गेहूँ के ज्वारे का रस पिने के फायदे:

  1. कैंसर किलर हैं, कैंसर के मरीजों को ये नियमित लेना चाहिए मधुमेह के रोगियों के लिए वरदान हैं। खून की कमी को चमत्कारिक रूप से पूरा करता हैं। हृदय रोगियों के लिए वरदान हैं। गर्भिणी महिलाओ के लिए वरदान हैं।
  1. शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकलता हैं। मोटापे के रोगियों के लिए वरदान हैं शरीर की ऊर्जा को बढ़ा देता हैं, खिलाड़ियों के लिए ये वरदान हैं। त्वचा सम्बंधित रोगो में वरदान हैं शरीरी की दुर्गन्ध को दूर करता हैं बुढ़ापे को रोकता हैं। वीर्य की कमी को पूरा करता हैं। ऐसे ढेरो गुण समाये हैं
  1. गेहूँ घास के सेवन से कोष्ठबद्धता, एसिडिटी , गठिया, भगंदर, मधुमेह, बवासीर, खासी, दमा, नेत्ररोग,म्यूकस, उच्चरक्तचाप, वायु विकार,किडनी रोग,यकृत,तिल्ली रोग इत्यादि में भी अप्रत्याशित लाभ होता है।
  1. इसके रस के सेवन से अपार शारीरिक शक्ति कि वृद्धि होती है तथा मूत्राशय कि पथरी के लिए तो यह रामबाण है।
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निरोगी रहने हेतु महामन्त्र:

मन्त्र 1:

  • भोजन व पानी के सेवन प्राकृतिक नियमानुसार करें
  • रिफाइन्ड नमक,रिफाइन्ड तेल,रिफाइन्ड शक्कर (चीनी) व रिफाइन्ड आटा ( मैदा ) का सेवन न करें
  • विकारों को पनपने न दें (काम,क्रोध, लोभ,मोह,इर्ष्या,)
  • वेगो को न रोकें ( मल,मुत्र,प्यास,जंभाई, हंसी,अश्रु,वीर्य,अपानवायु, भूख,छींक,डकार,वमन,नींद,)
  • ‎एल्मुनियम बर्तन का उपयोग न करें ( मिट्टी के सर्वोत्तम)
  • मोटे अनाज व छिलके वाली दालों का अत्यद्धिक सेवन करें
  • भगवान में श्रद्धा व विश्वास रखें

मन्त्र 2:

  • पथ्य भोजन ही करें ( जंक फूड न खाएं)
  • भोजन को पचने दें ( भोजन करते समय पानी न पीयें एक या दो घुट भोजन के बाद जरूर पिये व डेढ़ घण्टे बाद पानी जरूर पिये)
  • ‎सुबह उठेते ही 2 से 3 गिलास गुनगुने पानी का सेवन कर शौच क्रिया को जाये
  • ठंडा पानी बर्फ के पानी का सेवन न करें
  • पानी हमेशा बैठ कर घुट घुट कर पिये
  • बार बार भोजन न करें आर्थत एक भोजन पूर्णतः पचने के बाद ही दूसरा भोजन करें

भाई राजीव दीक्षित जी के सपने स्वस्थ भारत समृद्ध भारत और स्वदेशी भारत स्वावलंबी भारत स्वाभिमानी भारत के निर्माण में एक पहल आप सब भी अपने जीवन मे भाई राजीव दीक्षित जी को अवश्य सुनें….

स्वदेशीमय भारत ही हमारा अंतिम लक्ष्य है :- भाई राजीव दीक्षित जी

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