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जडी़-बूटी दिवस पर विशेष – Natural Medicine

A, B, C, D (जडी़-बूटी / Natural Medicine दिवस पर विशेष) – आचार्य राहुलदेवः

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A – (Asthama) दमा B – (B.P) रक्तचाप C – (cancer) कर्क रोग D – (Daibetes) मधुमेह

A, B, C, D, ये चारों रोग जब हो जाते हैं तो ये लगे रहते हैं। ऐसा लोक में कहा जाता है कि ये चारों रोग कभी क्योर सम्पूर्ण रुप से ठीक नहीं होते। इसे कंट्रोल करके रखना पडता है। वैसे ये चारों ही जानलेवा है। और अन्य रोगों के सगे भी हैं। क्योंकि इन्हें यदि समय रहते न संभाला जाये तो ये अपने अनेक रिश्तेदारों को बुला लेते हैं। अर्थात् इन रोगों में लापरवाही करने से दूसरे अनेकों रोग मुफ्त में मिल जाते हैं।

इस लेख को लिखने का उद्देश्य यह है कि इन चारों ही बीमारी में लम्बे समय तक एलोपैथी की दवाई चलती है। डाक्टर भी यही सलाह देते है कि ये दवाई मत छोडना नहीं तो मारे जाओगे। यदि जीना है तो ये दवाई लेते रहो। अब हम इसका शरीर विज्ञान के आधार पर विश्लेषण करेंगे। क्या वास्तव में हम इन दवाइयों पर ही निर्भर रहें या कोई और भी उपाय है। आज बीपी और डायबटीज ये रोग सामान्य हो गये हैं, यह घर-घर की कहानी हो गई है। ये रोग बनते कैसे हैं और बने क्यों रहते हैं। इसको जाने बिना इसका उत्तम समाधान भी नहीं हो सकता।

१) लाईफ स्टाईल,
२) बैड हेबीड्स,
३) प्रतिकुल एवं अनियमित आहार-विहार
४) अनियंत्रित नींद
५) तनाव (चिन्ता, स्ट्रेस या टेंशन)

ये पाँच प्रमुख अंग है। जिनके करण हम आसाधारण रोगों से मित्रता कर लेते हैं फिर चाहकर भी हम इनसे दोस्ती तोड़ नहीं पाते।
जब आप चल फिर सकते है अपने सब काम खुद करते है तो इसके बाद भी आप इन उपरोक्त रोगों में आजीवन एलोपैथी दवाई पर कैसे निर्भर रह सकते हैं? क्या आपने कभी सोचा है या अनुभव किया है कि डायबटीज और बीपी में लम्बे समय तक रहने के कारण आपको आँख, घुटना, कान, कीडनी, हार्ट, फेफडे, स्कीन, बाल झडना, कमजोरी, कमजोर हड्डियाँ, लीवर आदि की शिकायत शुरु हो जाती है। इसमें रोग से अधिक जिम्मेदार एलोपैथी दवाइयां होती हैं। आप चाहें तो डाक्टर के बताये अनुसार उनका कोर्स छः महीने या एक साल का कम्पलीट करके आप धीरे धीरे दवाईयों को छोड़कर अपने नियमित उत्तम दिनचर्या, व्यायाम, प्राणायाम और अच्छे भोजन के द्वारा सम्पूर्ण लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

पर हमने भी ठाना होता है कि हम जब पैसे से स्वास्थ खरीद सकते है तो क्यों परिश्रम करना? क्यों सुबह सुबह उठना? प्राणायाम करना और मार्निंग वाक करना? क्यों माथा पच्ची करना? परन्तु हम ये नहीं समझ पाते है कि हम स्वास्थ्य नहीं खरीद सकते, हम दवाई खरीदते हैं। और आजकल दवाई खरीदना मतलब रोग खरीदना है।

मैं यहाँ स्पष्ट करना चाहता हूँ कि डाक्टर की दवाई आप एकदम से बन्द न करें परन्तु उसी पर जीवन भर निर्भर रहना और अधिक जल्दी मौत को दावत देना है। प्राकृतिक तरीके से उपचार लेकर और आयुर्वेदिक दवाइयों / Natural Medicine के द्वारा हम इसे रिप्लेस कर सकते है। देखिये एलोपैथी से उत्तम आयुर्वेदिक है और आयुर्वेदिक से उत्तम घरेलु उपचार है और घरेलु उपचार से भी उत्तम व्यायाम, प्राणायाम, नियमित दिनचर्या, उचित भोजन, ध्यान और सन्ध्या करना तथा सदैव संतोष और प्रसन्न रहना ही उत्तम जीवन है।

आप मधुमेह, बीपी, जैसे रोगों से ग्रसित होकर भी जब रात को सोना हो और आपके पास समय है तब भी जल्दी नहीं सोते और सुबह उठते समय भी आलस्य के कारण नहीं उठते और फिर सोचते है क्या उठना यार? कुछ होगा तो दवाई खा लेंगे। ये जो दवाई खा लेंगे वाली बात शरीर को हजम नहीं होती। वह भी समझ जाता है और कहता है इसे सबक सीखाना ही होगा।

हमें आलस्य में पडे रहने, प्रमादी जीवन अपनाने, स्वभाव के विरुद्ध खाने, कभी भी सोने उठने, अति ठंडी चीजे खाने, धूम्रपान करने, आदि इन गलतियों के कारण हमें दंड स्वरुप मधुमेह, अस्थमा, बीपी और कैंसर जैसे रोग हो जाते हैं। और जब हो जाते तब भी हम नहीं सुधरते, सोचते हैं दवाई है ना खा लेंगे और ठीक हो जायेंगे। परन्तु दवाओं के भरोसे रहने के कारण, वे भी एलोपैथी दवाओं के लम्बे उपयोग के कारण हमारा शरीर बर्बाद हो जाता है।

दवाई का मतलब स्वास्थ्य नही होता। स्वास्थ्य का मतलब होता है सुबह जल्दी उठना, दांत और पेट साफ करके प्राणायाम और योगासन करना, फिर प्रातःभ्रमण और दौड़ लगाना, सुबह सुबह पेट का सबसे पहला परिचय तेल वाली चीजों से नहीं करवाना, भीगे हुये या उबले हुये पदार्थ लेना, अति ठंडे पदार्थ कभी न खाना, संतोषी जीवन जीना, नियमित सन्ध्या करना, परमात्मा का धन्यवाद करना, किसी से ईर्ष्या नहीं कराना। किसी का अपकार नहीं करना, इन नियमों के पालन से स्वास्थ्य मिलता है या उत्तम स्वास्थ्य बना रहता है।

एक रिपोर्ट के अनुसार चीनी खाना सिगरेट पीने जितना हानिकारक है। ऐसे ही नमक का अधिक प्रयोग भी हानिकारक है। आज सबसे ज्यादा बीमार देर में सोना और देर में उठना और दूसरा तनाव के कारण हो रहें हैं। क्या आपको पता है एक घंटे की शान्त और शिष्ट नींद में २५ लाख रुपये की प्राप्ति के समान सुख होता है। और सुबह ५, ६ बजे के बाद सोना प्रति घंटे १ करोड़ रुपये की हानि के बराबर है। यदि आपको दस बजे सोना चाहिए और आप १२ बजे सोते हो तो आप अपने पचास लाख रुपये खो रहे हो और सुबह ५ बजे उठना चाहिए और आप ८ बजे उठ रहे हो तो आप अपने ३ करोड़ रुपये खो रहे हो। अब बताओ आप ऐसे में दरिद्र और रोगी नहीं रहोगे तो क्या रहोगे?

अब आपको निश्चय करना होगा कि आप सिर्फ़ दवाई पर निर्भर नहीं रहेंगे। अति वृद्ध जिनके हाथ पैर नहीं चलते या चारपाई पर पडे मरीज़ को छोड़कर बाकी लोगों को जरुर इसका ध्यान रखना चाहिये। किसी कारण वश आप बाहर विवाह आदि में चले गये एक महीना वहाँ रह गये आपका रोग बढ गया आप वापस आकर दवाई लीजिए परन्तु फिर एक दो महीने में दवाई बन्द करके अपने नियमित व्यायाम और दिनचर्या अपनाकर धीरे-धीरे फिर दवाई बन्द करें। ऐसा आप अन्य रोगों में भी कर सकते है। पर यह सब आपकी इच्छाशक्ति पर निर्भर है परन्तु आप रोगों को चैक करवाना और टेस्ट करवाना कभी न छोडे़।

हम यहाँ पर इसके कुछ आयुर्वेदिक उपचार और आवश्यक उपाय बता रहे हैं –

१) A – Asthma – दमा

धूल और प्रदुषण से दूर रहकर अपने घर को साफ सूथरा और हवादार रखें। घर में अच्छे पौधे रखें। योगासन में अर्धमत्स्येंद्रासन, पवनमुक्तासन सेतुबंधासन, भुजंगासन, अधोमुख श्वानासन बद्ध कोणासन, पूर्वोत्तानासन, प्राणायाम में नाड़ी नाड़ी शोधन प्राणायाम और कपालभाती प्राणायाम करें

आयुर्वेदिक औषधि

१) लक्ष्मी विलास रस वटी
२) संजीवनी वटी
३) शीलाजीत रसायन वटी

तीनों में से एक एक गोली दिन में तीन बार प्रातः नाश्ता, दोपहर भोजन एवं रात्रि भोजन के बाद गुनगुने पानी या रात को हल्दी मिलाकर उबाले हुए दूध से ग्रहण करें।

श्वासारि रस – 20 ग्राम
अभ्रकभस्म – 5 ग्राम
प्रवाल पिष्टी – 10 ग्राम
सितोपलादि – 25 ग्राम
त्रिकूट चूर्ण – 10 ग्राम
स्वर्ण बसन्त मालती रस – 2 ग्राम

सब औषधियों को मिलाकर खरल कर लें और 60 पुडिया बनाएं। प्रतिदिन एक-एक पुड़िया प्रातः नाश्ते एवं रात्रि भोजन से आधा घंटा पहले जल, शहद या मलाई से सेवन करें।

अपथ्य – घी, तेल खटाई ठंडी वस्तुएं, केला, दही आइसक्रीम आदि का सेवन करने से बचें गुनगुना पानी लेने का अभ्यास करें। मालिश करके स्नान करने का अभ्यास डालें।

२) B – BP – रक्तचाप हायपरटेंशन

१. लहसुन की दो या तीन कलियों रात को पानी में भिगो दें सुबह खाली पेट पानी के साथ गील लें या चबाकर खायें। चबाने में दिक्कत हो तो लहसुन के रस की 5-6 बूंद 20 मिली पानी में मिलाकर ले सकते हैं।

२. मेथी और अजवाइन के पानी का प्रयोग भी किया जा सकता है। इसके लिए एक चम्मच मेथी और अजवाइन पाउडर को पानी में भिगोएं और सुबह इस पानी को पी लें।

३. त्रिफला के पानी का प्रयोग भी कर सकते हैं। 20 ग्राम त्रिफला को रात में पानी में भिगो दें और सुबह पानी को सुबह निथारकर दो चम्मच शहद मिलाकर पीने से हाइपरटेंशन में फायदा मिलता है।

सबसे जरूरी है एक शेड्यूल बनाना। सोने से लेकर उठने, एक्सरसाइजिंग और योग हर एक चीज़ का समय निर्धारित करें। हाइपरटेंशन के रोगियों को रोजाना या हफ्ते में तीन से चार बार पूरे शरीर पर तेल से मालिश करनी चाहिए। खाने में सब्ज़ियों और फलों की मात्रा बढ़ाएं। लगभग सारी हरी सब्ज़ियां और मौसमी फलों फायदेमंद होते हैं। दूध में हल्दी और दालचीनी का प्रयोग करने से लाभ मिलता है।

हाइपरटेंशन उच्च रक्तचाप की सबसे बड़ी वजह है तनाव जिसे दूर करने के लिए योग और प्राणायाम सबसे अचूक उपाय हैं। ताड़ासन, पवनमुक्तासन, शलभासन और योगनिद्रा के अलावा भ्रामरी, अनुलोम-विलोम का प्रयोग भी कर सकते हैं। अगर हम ओम् का जप करते हैं तो इससे भी बहुत फायदा मिलता है।

आयुर्वेदिक औषधि

१) मुक्ता वटी
२) मेधा वटी
३) गिलोय घन वटी

तीनों की एक एक गोली प्रातः खाली पेट व सायंकाल खाने से एक घंटा पहले पानी से लें

१) आंवला एलोवेरा स्वरस
२) लौकी स्वरस

प्रतिदिन सुबह खाली पेट १-१ ढक्कन रस १-१ ढक्कन पानी मिलाकर सेवन करें।

१) अर्जुन क्षीर पाक लेना अति उत्तम है।
२) अर्जुन क्वाथ (चाय) बनाकर सेवन करें

अपथ्य – बीपी उच्च रक्त चाप हाइपरटेंशन के रोगियों को चिंता, भय और क्रोध से खुद को बचाना है। डिब्बा बंद, बासी, ज़्यादा तला हुआ, मिर्च-मसालेदार, ज्यादा नमक वाला खाना कम करना चाहिए। सेंधा नमक का प्रयोग करें।

३) C – Cancer कैंसर कर्करोग

इस रोग के लिये मैं किसी भी प्रकार की एलोपैथी की दवाई के लिये परहेज करने के लिये नहीं कहूँगा। जैसे स्पेलिस्ट डाक्टर सलाह दे रहे है कीमो थैरेपी या रेडिएशन थैरेपी और जो भी थैरेपी बताये वे करें। परन्तु थैरेपी लेने के २-४ महीने बाद आप निम्न आयुर्वेद की दवा निरन्तर ले सकते हैं। कैंसर में होमियो पैथी भी कारगर है। जिसका नाम मैं यहाँ नही दे रहा हूँ।

केंसर की चिकित्सा के लिये आयुर्वेदिक औषधि

(पथ्य – १)

१) गेहूं के जवारे का रस – २५मिली
२) गिलोय का रस – २५ मिली
३) घृतकुमारी का रस – २५ मिली
४) गोधन अर्क – २५ मिली
५) नीम पत्र – ५ पत्ते
६) तुलसी पत्र – ७ पत्ते

इनको मिलाकर सुबह-शाम दो बार खाली पेट सेवन करें।

(पथ्य – २)

१) संजीवनी वटी – २० ग्रा
२) शिला सिंदूर – ३ ग्रा
३) ताम्र भस्म – १ ग्रा
४) गिलोय सत – २० ग्रा
५) अभ्रक भस्म – ५ ग्रा
६) हीरक भस्म – ३००मि ग्रा
७) स्वर्ण बसंत मालती रस – २ ग्रा
८) मुक्ता पिष्टी – ४ ग्रा
९) प्रवाल पंचामृत – ५ ग्रा

सब औषधियों को मिलाकर 90 पुड़िया बनाए। प्रातः दोपहर एवं रात्रि भोजन से आधा घंटा पहले जल, शहद या मलाई से सेवन करें।

(पथ्य- ३)

१) कांचनार गुग्गुल
२) आरोग्यवर्धिनी वटी
३) वृद्धिवाधिका वटी
४) गिलोय घन वटी
५) तुलसी घन वटी

एक-एक गोली दिन में तीन बार प्रातः नाश्ते, दोपहर भोजन एवं रात्रि भोजन के आधे घंटे के बाद गुनगुने पानी से सेवन करें।

रामबाण – १) देशी काली गाय जो गर्भवती नहीं है उसका मूत्र दो बार सुबह शाम ४-४ ढक्कन पीना।
२) सुबह शाम एक गिलास गुन गुने पानी में शुद्ध हल्दी पाउडर आधा चम्मच डालकर पीना।
३) पपीते के पत्ते की चाय बनाकर लेना। इन तीनों में करक्युम पाया जाता है जो कैंसर के लिये काल माना जाता है।
सावधानी – कीमो थैरेपी लेते समय इनका सेवन नहीं करना चाहिये क्यों कीमो में भी करक्युम होता है।

४) D – Daibetes – मधुमेह

जानिए क्‍या है Daibetes type 1 और type 2 diabetes में अंतर

डायबिटीज दो तरह की होती है, type 1 और type 2 diabetes दोनों का इलाज करने के लिए दोनों के बीच के अंतर को जानना जरूरी है।

भारत में डायबिटीज से ग्रस्‍त लोगों की संख्‍या तेजी से बढ़ रही है। डायबिटीज से बचाव के लिए जरूरी है कि सभी को इसके बारे में पूरी जानकारी हो। असल में डायबिटीज टाइप 1 और टाइप 2 दो तरह की होती है। हालांकि दोनों में ही शरीर में ब्‍लड शुगर की मात्रा बढ़ जाती है लेकिन दोनों की वजहों और इलाज में काफी अंतर है।

Diabetes type 1

डायबिटीज का मतलब: हम जो खाते हैं उसी से हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है। हमारा शरीर भोजन को पचाकर उससे निकली शुगर को ऊर्जा में बदलता है। इस पूरी प्रक्रिया में इंसुलिन का बहुत योगदान होता है।

इंसुलिन हमारे शरीर में बनने वाला एक हॉर्मोन है जो हमारे ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल करता है। यह हमारे शरीर में अग्‍नाशय या पैंक्रियाज नामकी एक ग्रंथि में बनता है। इसके असर से खून में मौजूद शुगर हमारे शरीर की कोशिकाओं में स्‍टोर हो जाती है। डायबिटीज में या तो हमारे शरीर में इंसुलिन बनता ही नहीं है या हमारे शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति संवेदनशील नहीं रह जातीं और शुगर उनमें स्‍टोर न होकर खून में मौजूद रहती है।

टाइप 1 और 2 की वजहें अलग

टाइप 1 डायबिटीज में हमारा शरीर इंसुलिन बनाना ही बंद कर देता है। यह एक ऑटोइम्‍यून डिजीज है। मतलब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन बनाने वाले अग्‍नाशय की कोशिकाओं पर हमला कर उन्‍हें खत्‍म कर देती हैं। ऐसा आनुवांशिक वजहों से हो सकता है। टाइप 1 बहुत कम उम्र में या कभी-कभी जन्‍म से हो जाता है।

वहीं टाइप 2 डायबिटीज के लिए कई कारक जिम्‍मेदार हैं। इनमें मोटापा, हाइपरटेंशन, नींद की कमी और खराब लाइफस्‍टाइल शामिल हैं। जानकार आनुवांशिक वजहों को भी गिनते हैं। इसमें शरीर में या तो इंसुलिन कम बनता है या फिर शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति संवेदनशील नहीं रह जातीं। टाइप 2 के लिए चूंकि खराब जीवनशैली जिम्‍मेदार है इसलिए यह कभी भी हो सकती है पर अमूमन यह वयस्‍क लोगों में होती है।

टाइप 1 और टाइप 2 का इलाज भी अलग

चूंकि टाइप 1 डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन बनता ही नहीं है इसलिए इसमें मरीज को समय-समय पर इंसुलिन को इंजेक्‍शन या पंप के जरिए लेना पड़ता है।

टाइप 2 डायबिटीज में या तो इंसुलिन कम बनता है या फिर शरीर उसके प्रति संवेदनशील नहीं रहता इसलिए इसमें दवाओं के जरिए शरीर को और इंसुलिन बनने के लिए प्रेरित किया जाता है। जरूरत पड़ने पर इंसुलिन भी दी जाती है।

चूंकि मूलत: यह खराब जीवनशैली के चलते हुआ है इसलिए वजन कम करने, संत‍ुलित आहार खाने, कसरत करने और तनाव कम करने वगैरह पर जोर दिया जाता है। ऐसा करने से शरीर इंसुलिन के प्रति फिर से संवेदनशील हो सकता है।

योगासन – मण्डूकासन, शशकासन, हलासन सर्वाङ्गासन, पश्चिमोत्तानासन, शलभासन, नौकासन धानुरासन, भुजंगासन वज्रासन

प्राणायाम – भस्रिका, कपालभांति, बाह्य प्राणायाम, तीन बन्ध अनुलोम विलोम, अग्निसार क्रिया

प्रातः भ्रमण १ घंटा, दौड, सूर्य नमस्कार, दंड बैठक, योगिंग जोगिंग, तैरना आदि। यथा ससम्भव खुद के कार्य खुद करना। दिन में नहीं सोना। पेट के बल नहीं सोना। भोजन करते ही पानी नहीं पीना। रात को ११ बजे से पहले सोना। सुबह ५ बजे किसी भी कीमत पर उठना। दोपर भोजन के बाद वज्रासन में बैठना। रात को भोजन के बाद टहलना। सुबह भीगे हुये मूंग मोठ चना बादाम तथा कई अनाज मिक्स वाला दलिया खाना। हर समय भोजन चबा चबाकर खाना। चीनी, मैदा, पावरोटी, तले हुये पदार्थ का सेवन न करना। नीम करेला, मेथी, अजवाइन, जीरा, हल्दी, दालचीनी हरी सब्जियों का प्रयोग अधिक से अधिक करना। जामुन, पपीता, अमरूद, नाशपाती अनार आदि फलों का सेवन करना दोपहर भोजन और रात भोजन में सलाद और कच्ची सब्जियों का प्रयोग करना आदि आदि

आयुर्वेदिक औषधि

जो मरीज हर ओर से डायबिटीज़ से परेशान और निराश हो चुके हों वो इस इलाज़ को कर लें, 1 महीने में शुगर नार्मल रहने लगेगी, 6 महीने बाद दवाओं की ज़रूरत बहुत कम रह जायेगी।

१) आँवला करेला स्वरस
२) आँवला गिलोय स्वरस

सुबह खाली पेट दो-दो ढक्कन रस दो-दो ढक्कन पानी के साथ

१) नीम घन वटी
२) तुलसी घन वटी
३) मधु कल्प वटी

नाश्ते से 20 मीनट पहले १-१ गोली लें।

बसंत कुसुमाकर रस – 2 ग्राम
गिलोय सत् – 20 ग्राम
प्रवाल पंचामृत – 10 ग्राम
मोती पिष्टी – 4 ग्राम
स्वर्ण माक्षिक भस्म – 5 ग्राम
अभ्रक भस्म – 5 ग्राम

मिला कर इसे खरल कर पाउडर की 60 पुड़िया बनायें! 1-1 पुड़िया नाश्ता और रात्री भोजन से 20 मीनट पहले पानी से खाएं।

१) मधुनाशनी वटी
२) चंद्रप्रभा वटी
३) आरोग्य वर्धनी वटी

1 -1 गोली रात को भोजन के आधे घंटे बाद पानी से लें।

१) शिलाजीत सत्
२) अश्वगन्धा चूर्ण

जिनका वजन तेजी से कम हुआ है जो बहुत दुर्बल हो गये हैं। वे रात को भोजन के आधे घंटे बाद शिलाजीत दुध में १ बूँद डालें और लें या अश्वगन्धा पाउडर आधा चम्मच खाकर ऊपर से दूध पी लें। जिन्हें दूध रुचिकर नहीं लगता गुन गुने पानी से लें।

रामबाण इलाज – रात को इन्द्रजौ का आटा आधा चम्मच, आधे गिलास पानी में भिगो दें। सुबह खाली पेट उसके ऊपर का पानी पी ले आटा फेंक दें। तनाव न लेना न करना मधुमेह में बहुत आवश्यक है चिन्ता रहित जीवन जीयें।

इस इलाज़ से कितना भी पुराना या जटिल डायबिटीज़ का रोगी हो उसे निश्चित लाभ मिलेगा। भोजन में 3 महीने तक परहेज ज़रूरी है, अगर संभव हो तो सुबह 100 ग्राम लौकी का जूस पियें।

आइये A, B, C, D इन चारों रोगों का प्राकृतिक रुप से उपचार करें। सबसे पहले यह ध्यान रखे कि मेरा सबसे पहला उत्तम चिकित्सक मैं स्वयं हूँ।

सम दोषः समाग्निश्च सम धातु मल क्रियः।
प्रसन्नात्मेन्द्रिय मनः स्वस्थ इत्यभिधीयते।।

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